विकलांग मानसिकता

जब भी किसी किसी न्यूज़ पेपर में या सोशल मीडिया में ये खबर आती है कि किसी के साथ बलात्कार जैसा प्रताड़न हुआ है, रूह अंदर से कांप जाती है, सोचती हूं ये कैसी मानसिकता है जिसमे सिर्फ जिस्म की चाहत में किसी के रूह को निचोड़ा जाता है, कैसी हैवानियत होगी उनके अंदर जो लोग ऐसा करते है, किसी भी उम्र का किसी की मासूमियत तक कि परवाह नही करते है, फिर सोचती हूं की क्या उनके घर मे उनकी माँ बहन बेटी सुरक्षित होगी और ये सोच के ऐसा लगता है जैसे इंसानियत खत्म हो चुकी है, सोचती हूं कि उनके परिवार में जो भी माँ बहन बेटी होगी क्या उनके साथ भी ऐसा ही होता होगा, क्या ऐसा शर्मनाक हरकत करने के बाद वो अपने माँ बहन बेटी से नजर मिला पाते होंगे, या उनके रिश्ते भी हैवानियत की बली चढ़ चुकी होगी।।

उस लड़की, बच्ची या औरत पर क्या गुजरती होगी जब उनके साथ ऐसा कुछ होता होगा और फिर भी दोष उन्हें ही दिया जाता होगा, कैसा लगता होगा जब उन्हें खुद पर ही शर्म आती होगी जबकि उन्हें पता होता है इसमें उनकी कोई गलती है भी नही, फिर भी वो उस पल को याद कर न जाने खुद को कितना कोसती होगी, कई रातो में डर कर जाग जाती होगी, तो कई रातो में शायद उन्हें नींद आती भी नही होगी, हर किसी को जब वो शक के नजर से देखती होगी कैसा लगता होगा जब वो घर से बाहर निकलती होगी, कितना मुश्किल होता होगा उन्हें सम्भालना, लोगो के बेहूदे ताने सुनना, शायद हम कभी उसका अंदाजा लगा भी नही सकते कि उस पल उनपर क्या गुजरती होगी।।

मुझे लगता है ऐसे लोग बीमार होते है बहुत बीमार बीमारी उनकी मानसिकता की, उनकी मानसिकता शायद इतनी विकलांग होती है कि उन्हें सही गलत के बीच का अंतर ही समझ नही आता, शरीर से बीमार व्यक्ति एक बार ठीक हो सकता है लेकिन जिसकी मानसिकता ही बीमार हो चुकी हो जो दिमाग से विकलांग हो चुका हो उसको ठीक करना इतना आसान कहा होगा।।

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